सोमा उराव, मेगा उरांव, शनि टोप्पो, जनजातीय सुरक्षा मंच ये वास्तविक सच्चाई जान ले आदिवासियों के जमीन की मिल्कियत, उत्तराधिकारी व शादी विवाह के अपने कायदे-कानून है, जमीन के विवादों और पारिवारिक मसलों को सुलझाने के लिए अपने अलग कानून और अपने परंपरागत रूढ़िवादी स्वशासन व्यवस्था की अदालते है, जिन्हें विशेष संवैधानिक सुरक्षा कवच प्राप्त है। इसीलिए
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अंदरखाने भारत सरकार भी कॉमन सिविल कोड यानि समान नागरिक संहिता से आदिवासियों को बाहर रखने का मन बना चुकी है । देख लो जयचंदो भारत सरकार मान चुकी है व मनाती आ रही है कि आदिवासी में उनकी अलग रूढी-परंपरा, विधि-विधान विद्ययमान है, तो तुम्हारी क्या विषाद… आदिवासी धरतीपुत्र है और देश के प्रथम नागरिक ।
आदिवासी हिंदू दुषाद नहीं है। तुम अपनी अकावों, मनुवादियों की तलवे चाटो और गुलामी करते रहो।
संजय पाहन, केंद्रीय प्रवक्ता, राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा, भारत ।